राजस्थान के मंदिर

राजस्थान के मंदिर

राजस्थान के मंदिर

आपको राजस्थान के मंदिर के बारे में बताया जा रहा है।

कलिका माता का मंदिर चितौड़गढ़ में स्थित हैं।

आई माता का मंदिर बिलाड़ा जोधपुर में स्थित है।

त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर बांसवाड़ा में स्थित हैं।

नीमच माता का मंदिर उदयपुर में स्थित हैं।

दधिमाता माता का मंदिर गोठमांगलोद नागौर में स्थित है।

अम्बाजी माता का मंदिर आबू रोड़ में स्थित हैं।

ब्राह्मणी माता का मंदिर सोरसन बांरा में स्थित हैं।

नारायणी माता का मंदिर अलवर में स्थित है।

रणछोड़ जी मंदिर अलवर में स्थित हैं।

नाथ जी का मंदिर अलवर में स्थित हैं।

खाटूश्याम जी का मंदिर सीकर में स्थित हैं।

कमलेश्वर महादेव जी का मंदिर बूंदी में स्थित हैं।

एकंलिग जी मंदिर उदयपुर मेंवाड़ में स्थित हैं।

मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर दौसा में स्थित हैं।

राजस्थान के मंदिर
राजस्थान के मंदिर

 

सालासर बालाजी का मंदिर चुरू में स्थित हैं।

पाण्डुपोल हनुमान जी का मंदिर अलवर में स्थित हैं।

चार चाैंमा शिव जी मंदिर कोटा में स्थित है।

बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर कोटा में स्थित है।

कंसुआ का शिव मंदिर कोटा में स्थित है।

विभीषण जी का मंदिर कैथून (कोटा) में स्थित है।

श्री रंगनाथ जी मंदिर अजमेर जिले में स्थित है।

रणकपुर जैन मंदिर पाली में स्थित है।

कंठसरी माता मंदिर उदयपुर में स्थित है।

हिचकी माता मंदिर सनवाड़ा में स्थित हैं।

शिलादेवी की मूर्ति मानसिंह जस्सोर के लेकर आये थे।

राठासण देवी का मंदिर नागदा उदयपुर में स्थित है।

धौलागढ़ माता का मंदिर अलवर में स्थित है।

लोकदेवी रूपादे का प्रसिद्ध मंदिर मालाजाल बालोतरा मे स्थित है।

ब्रहामणी माता का सोरसण बांरा में स्थित है।

एकमात्र लोकदेवी ब्रहामणी माता जिनकी पीठ की पूजा की जाती है।

कंठसरी माता के आदिवासी की देवी कहते है।

अंता देवी की ऊंटो की देवी कहते हैं।

कंजर जाति की कुलदवी जोगणिया माता को कहते है।

नागणेची माता का प्रसिद्ध मंदिर नागाणा बालोतरा।

मंशा माता मंशा देवी के क्रमशः मंदिर झुन्झुनू व चूरू स्थित है।

आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह सुगाली माता की पूजा करते थे।

तनोट माता मंदिर जैसलमेर में स्थित हैं।

सेना के जवानों की देवी तनोट माता है।

तनोट माता के मंदिर का निर्माण तनुराव ने भाटी ने करवाया था।

कैलादेवी का मंदिर करौली में स्थित है।

कैलादेवी को अंजनी माता भी कहा जाता है।

शिला देवी का मंदिर आमेर जयपुर में स्थित हैं।

सुंधा माता का मंदिर जालौर में स्थित हैं।

मनसा माता का मंदिर झुंन्झुनु में स्थित हैं।

तुलजा भवानी का मंदिर चितौड़गढ में स्थित है।

करणी माता का मंदिर बीकानेर में स्थित है।

करणी माता को करनल किनीयाणी के नाम से जाना जाता है।

बीजासन माता का मंदिर बूंदी में स्थित हैं।

शीतला माता का मंदिर का जयपुर में स्थित हैं।

चौथ माता का मंदिर का मंदिर सवाईमाधोपुर में स्थित है।

शारदा देवी/सरस्वती माता का मंदिर पिलानी झुन्झुनू में स्थित है।

सुराणा माता का मंदिर नागौर में स्थित हैं।

आई माता के मंदिर को दरगाह हैं।

आमजा माता मंदिर केलवाड़ा में स्थित हैं।

करणी माता ने मेहरनगढ दुर्ग की नींव रखी थी।

चौरासी खम्भा का मंदिर डीग में स्थित है।

पूंछरी दुर्ग स्थापत्य शैली का नीलकण्ठ मंदिर रणकपुर बाणमाता मंदिर का

पूंछरी का लोटा मंदिर डीग में स्थित है।

जीण माता का मंदिर सीकर में स्थित हैं। इनको गजरा वाली देवी कहा जाता है, बचपन का नाम जीवण बाई था, माता को ढाई प्याले शराब व बकरे के कान चढ़ाये जाते है।

इस पोस्ट को जल्द ही और अपडेट किया जायेगा।

धन्यवाद

राजस्थान के दुर्ग

Thanks for reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!