राजस्थान के दुर्ग
राजस्थान के दुर्ग
आपको इस पोस्ट में राज्य के दुर्गो के बारे में बताया जाएगा। यह टॉपिक राजस्थान की अनेक भर्तियों में आने वालों में से एक है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
राजस्थान हमेशा वीरों की भूमि रहा है यहाँ कई राजाओं ने अपनी सेना के लिए, रानियों के लिए, युद्ध में विजय के उपलक्ष्य में मेहमानों के आश्रय के लिए स्वयं के लिए दुर्गो का निर्माण करवाया।
लोहागढ़ दुर्ग
यह दुर्ग भरतपुर में स्थित हैं इस दुर्ग का निर्माण सूरजमल जाट ने 1733 -1734 में करवाया था यह पारिख व स्थल दुर्ग की श्रेणी में आता है। इस दुर्ग को अन्य नामों से भी जाना जाता है अभेद्य दुर्ग/पूर्वी सीमान्त का प्रहरी/ मिट्टी का किला/अजयगढ़ आदि।

तारागढ़ दुर्ग
यह दुर्ग बूंदी में स्थित हैं,यह एक गिरी दुर्ग है इस दुर्ग का निर्माण 14 वी शताब्दी में राव बरसिंह ने करवाया था मेवाड़, मालवा, गुजरात की और से आक्रमण की सभांवना को देखते हुए बूंदी की रक्षा करने के लिए करवाया था,यह दुर्ग अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस किले में गर्भगुंजन तोप रखी हुई है। इसमें रतन महल,बादल महल, छत्र महल, अनिरुद्ध महल, फूल महल आदि दर्शनीय स्थल है। इस दुर्ग के महलों के बारे में रूडयार्ड किपलिंग कहा था की ये महल मानव नहीं प्रेतों द्वारा बनाये गए लगते है।
जूनागढ़ का किला
यह किला बीकानेर में स्थित है। यह धान्वन व स्थल दुर्ग की श्रेणी में आता है। इस दुर्ग की नींव राव बीका ने रखी थी जो की बीकानेर के संस्थापक है तब इसे बीकानेर का किला कहते थे इसका पुनः निर्माण रायसिंह ने 1588 ईस्वी में करवाया था हिन्दू मुस्लिम शैली में फिर इस जूनागढ़ का किला कहने लगे इस किले का पुराना नाम चिंतामणि दुर्ग है।
सिवाणा का किला
यह दुर्ग बाड़मेर नए जिलों के अनुसार बालोतरा में स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण वीरनारायण पंवार ने 10 वीं शताब्दी में करवाया था यह दुर्ग छप्पन की पहाड़ियों की हल्देश्वर पहाड़ी पर होने के कारण यह दुर्ग मारवाड़ के शासको की शरण स्थली रहा है। गिरी सुमेल युद्ध के राव मालदेव ने इस दुर्ग में शरण ली थी। इस दुर्ग में शेर-ए-राजस्थान जयनारायण व्यास को बंदी बनाकर रखा गया था। इस दुर्ग को अणखलो सीवाणौ दुर्ग भी कहते है। इसे कुमट दुर्ग भी कहते है यह एक प्रकार की झाड़ी थी। इस दुर्ग पर लगभग 1310 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था वीर शीतल देव वीरगति को प्राप्त हुए थे और दुर्ग का अधिकार कर लिया गया था यह सिवाणा का पहला साका था इस को कमालुद्दीन गुर्ग को सौंप दिया था और इसका नाम खैराबाद रखा था।
भटनेर दुर्ग हनुमानगढ़ में स्थित हैं। राजस्थान का एकमात्र दुर्ग जिसमें राजपूत महिलाओं के साथ साथ मुस्लिम महिलाओं ने भी जौहर किया था।
भानगढ़ का किला अलवर में स्थित हैं। इस दुर्ग को भूतहा किला भी कहा जाता हे को खण्डरों का नगर।
गागरोन का किला
यह झालावाड़ में स्थित हैं यह जल (औदक) श्रेणी का दुर्ग है राजस्थान के गागरोन दुर्ग को डोडगढ़ व धुलरगढ़ दुर्ग कहा जाता है,कालीसिंध व आहू नदी के संगम पर गागरोन दुर्ग बनाया गया है। यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जो बिना किसी नींव के एक चट्टान पर खड़ा है इस दुर्ग का नाम गागरोन खींची राजवंश के संस्थापक देवनसिंह ने 1195 में रखा इस दुर्ग में मीठेशाह की दरगाह का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था। इस दुर्ग पर मालवा की सल्तनत कायम होने के बाद महमूद खिलजी ने इस दुर्ग का नाम मुस्तफाबाद रख दिया था। इस दुर्ग में सौ वर्षीय पंचांग रखा है संत पीपा की छतरी गागरोन दुर्ग में स्थित है।
भैसरोगढ़ दुर्ग
यह दुर्ग चम्बल और बामनी नदी यह दुर्ग चित्तौड़गढ़ में स्थित है यह एक जल (औदक) गढ़ है। इस दुर्ग को राजस्थान का वेल्लौर कहा जाता। है इस दुर्ग के कर्नल जेम्स टॉड ने कहा था जी उन्हें राजस्थान में जागीर पेश की जाये तो वे इस दुर्ग को ही चुनेंगे।
चूरू का किला
यह किला धान्वन श्रेणी का किला है इस किले से युद्ध के दौरान बारूद खत्म होने पर चाँदी के गोले दागे गए थे। इसलिए इसे चाँदी के गोले दागने वाला किला भी कहा जाता है।
शेरगढ़ दुर्ग
यह दुर्ग धौलपुर जिले में स्थित है। यह गिरी दुर्ग की श्रेणी में आता है। इसे धौलपुर दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। इस दुर्ग का निर्माण राजा मालदेव ने करवाया था। यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग है जो मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश की सीमाओं पर स्थित है। नोट → एक शेरगढ़ दुर्ग बारां में भी स्थित है।
नाहरगढ़ दुर्ग
यह दुर्ग जयपुर (आमेर) में स्थित हैं इस दुर्ग में एक जैसे नौ महल हैं। इस दुर्ग को सुदर्शनगढ़ और मीठड़ी का दुर्ग, जयपुर का मुकुट, जयपुर ध्वजगढ़ के नाम से भी जाना जाता हैं। इस किले के मुख्य प्रवेश द्वार का नाम ताड़ी द्वार हैं। इस दुर्ग का निर्माण जयसिंह द्वितीय ने 1734 ईस्वी में करवाया था मराठो के विरुद्ध रक्षा के लिए, इस दुर्ग का नाम लोकदेवता नाहरसिंह भोमिया के नाम पर ही नाहरगढ़ पड़ा। इस दुर्ग को महलों का दुर्ग भी कहते है। इस दुर्ग में एक जैसे नो महलों का निर्माण महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अपनी नौ पासवानों रानियों के लिए करवाया था।
जालौर दुर्ग
यह दुर्ग पश्चिमी राजस्थान का सबसे प्राचीन दुर्ग है इस दुर्ग को सोनगिरि/स्वर्णगिरी/सोनलगढ़ दुर्ग भी कहा जाता है,अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग का नाम जाबालीपुर कर दिया था। यहाँ पर जाबालि ऋषि तपस्या करते थे इसी कारण इसे जाबालिपुर पुर के नाम से भी जाना जाता है। इस दुर्ग में झालर और सोहन बावड़ी स्थित है। इस दुर्ग में राजा भोज परमार ने एक संस्कृत पाठशाला का निर्माण करवाया था।
जयगढ़ दुर्ग
यह दुर्ग जयपुर में स्थित हैं। इस किले का निर्माण चिल्ह का टीला पहाड़ी पर मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम के द्वारा करवाया गया था लेकिन इसे वर्तमान स्वरुप सवाई जयसिंह ने दिया इस दुर्ग में तीन प्रमुख द्वार है अवनि दरवाजा भेरू दरवाजा, डूंगर दरवाजा,आदि जयगढ़ किले पर कभी बाहरी आक्रमण नहीं हुआ था। इस किले में जयबाण तोप रखी हुई है जो एशिया की सबसे सबसे तोप है।
रणथम्भौर दुर्ग सवाईमाधोपुर में स्थित हैं।
तिमनगढ़ दुर्ग करौली में स्थित हैं।
तारागढ़ दुर्ग अजमेर में स्थित है एक बूंदी में भी है।
सरवाड़ का किला अजमेर में स्थित हैं।
चित्तौड़गढ़ का दुर्ग में स्थित है। इसका निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था।
जैसलमेर दुर्ग धान्वन दुर्ग हैं। इस दुर्ग को सोनार दुर्ग या स्वर्ण दुर्ग भी कहते हैं
शेरगढ़ दुर्ग बारां में स्थित है। परवन नदी के किनारे शेरगढ़ दुर्ग स्थित है।
राजस्थान के दुर्गो के बारे में बताया गया है इस पोस्ट को जल्दी ही अपडेट किया जायेगा आप बने तब तक के आप बने रहिये।
धन्यवाद
Thanks for reading
