स्वागत है आपका आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए है राजस्थान छतरियों का टॉपिक जो की राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
राजस्थान के कई प्रकार की छतरियों का निर्माण राजा महाराजाओं रानियों के द्वारा करवाया गया है इस टॉपिक में हम विस्तार से जानेंगे की राजस्थान की छतरियों के बारे में।
राजस्थान की छतरियाँ
ब्राह्मण देवता की छतरी जोधपुर जिले में स्थित है।
खम्भों की संख्या के आधार पर छतरियां
84 खम्भों की छतरी बूंदी जिले में स्थित है। इस छतरी का निर्माण 1683 – 1695 के बीच पूर्ण हुआ कोटा बूंदी रोड पर देवपुरा गांव के पास है यह छतरी भगवन शिव को समर्पित है।
80 खम्भों की छतरी अलवर यह छतरी मूसी महारानी की है इसका निर्माण 1815 ईस्वी में विनयसिंह ने करवाया था।
32 खम्भों की छतरी रानी सूर्य कंवर की जोधपुर में स्थित है।
शिवलिंग की छतरी जैत्र सिंह की हम्मीरदेव देव के पिता की स्मृति में 32 खम्भों की यह छतरी रणथम्भोर दुर्ग सवाईमाधोपुर में स्थित है।
जोधसिंह की छतरी यह 32 खम्भों की छतरी है बदनौर भीलवाड़ा में स्थित है।
गैटोर की छतरी जयपुर के नाहरगढ़ किले की तलहटी में कच्छवाहा वंश की है।
जसवंत थड़ा इसका निर्माण सरदार सिंह ने 1906 ईस्वी में जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में करवाया था। यह जोधपुर में स्थित है, इसे राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है।
राणा सांगा की छतरी माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में स्थित है।
गोरा धाय की छतरी अजीत सिंह की धाय माता है यह छतरी जोधपुर में स्थित है। यह छ खम्भों की छतरी है।
लालसोट दौसा की छतरी भी छ खम्भों की है।
केसर बाग की छतरियाँ यहाँ बूंदी के शासकों की छतरियाँ है प्राचीन छतरी है राव दूदा की और नवीन छतरी है विष्णुसिंह की।
नैड़ा की छतरियाँ अलवर जिले के सरिस्का वन क्षेत्र में स्थित है।
महाराणा प्रताप की छतरी बान्डौली में केजड़ बांध के ऊपर 8 खम्भों की छतरी है यह उदयपुर जिले में आती है।
गोपाल सिंह की छतरी यह करौली में स्थित है।
पृथ्वीराज सिसोदिया की छतरी यह कुम्भलगढ़ दुर्ग में स्थित है यह 12 खम्भों की छतरी है। यह दुर्ग राजसमंद में स्थित है।
कुत्ते की छतरी सवाईमाधोपुर रणथम्भोर दुर्ग में स्थित है।
नागौर यहाँ लाछा गुजरी की छतरी स्थित है।
नागौर अमरसिंह राठौड़ की छतरी स्थित है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में मीरा बाई के गुरु संत रैदास की छतरी, वीर कल्ला जी राठौड़ की छतरी, जयमल जी राठौड़ की छतरी, और प्रतापगढ़ के रावत बाघसिंह की छतरी स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था इस दुर्ग में खेती की जाती है। वीर कल्ला जी राठौड़ अकबर के विरुद्ध युद्ध किया था इन्हें चार हाथों वाले देवता भी कहा जाता है।
रूठी रानी की छतरी तारागढ़ दुर्ग में स्थित है यह अजमेर में स्थित है। एक तारागढ़ दुर्ग बूंदी में भी स्थित है।