राजस्थान की बावड़िया
राजस्थान की बावड़िया
आज की इस पोस्ट में हम आपके के लिए लेकर आए है राजस्थान की बावड़ियों का टॉपिक जो की राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण। है
तो चलिए शुरू करते है
परंपरागत सीढ़ीदार कुओं, तालाबों, कुंडों को बावड़ियाँ कहते हैं। इनका जलस्तर सीढ़ियों तक रहता है। इन्हें अंग्रेजी में step well कहते है।
बूंदी जिले को बावड़ियों का शहर कहा जाता है, क्योंकि यहाँ बहुत सारी बावड़ियां स्थित है, इसलिए इसे बावड़ियों का शहर कहा जाता है।

राजस्थान की प्रसिद्ध बावड़ियों के नाम
पन्ना मीना की बावड़ी ,आभानेरी दौसा की चांदबावड़ी, पेंच की बावड़ी, चमना बावड़ी, रानी जी की बावड़ी ,अनारकली की बावड़ी, नौलखा बावड़ी आदि कई बावड़िया व कुंड राजस्थान में स्थित है।
बूंदी की प्रसिद्ध बावड़ियाँ
रानी जी की बावड़ी बूंदी में स्थित है। यह बावड़ी सबसे प्रसिद्ध बावड़ी है इस बावड़ी का निर्माण 1699 में रानी नाथावती ने करवाया था। यह बावड़ी एशिया की सर्वश्रेष्ठ बावड़ियों में शामिल है। इसे stepwell सीढ़ियों वाला कुआँ कहा जाता है। इस बावड़ी की 27वीं सीढ़ी के दाईं (उल्टे) ओर बाएं (सीधे) भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियाँ हैं इस बावड़ी का मुख्य आकर्षण केंद्र तोरण द्वार है।
अनारकली की बावड़ी बूंदी में स्थित है। यह रानी नाथावती जी की दासी अनारकली द्वारा छत्रपुरा क्षेत्र में निर्मित है।
धाभाई कुंड बूंदी में स्थित है।
पेंच की बावड़ी बूंदी जिले की हिंडोली तहसील में स्थित है। यहाँ पर प्रसिद्ध लकड़ेश्वर महादेव जी का मंदिर स्थित है माना जाता है मस्सा की बीमारी ठीक होने के लिए यहाँ आना पड़ता है।
गंगासागर यमुनासागर कुंड बूंदी में स्थित है बूंदी में चौगान दरवाजे के बाहर रावराजा रामसिंह की रानी चंद्रभान कँवर द्वारा 1885 ईस्वी में बनाया गया कुंड इसे नागर सागर कुंड भी कहते है।
गोविंदपुर की बावड़ी बूंदी जिले में स्थित है।
काकाजी की बावड़ी बूंदी में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण इंद्रगढ़ के अधिपति सरदार सिंह की पत्नी महारानी आली ने करवाया था।
बावड़ी की वास्तुकला
नौलखा बावड़ी डूंगरपुर में स्थित है।
सीताराम जी की बावड़ी भीलवाड़ा में स्थित है।
मेड़तणी जी की बावड़ी झुंझुनू में स्थित है।
पन्ना मीणा की बावड़ी जयपुर में स्थित है।
खानिया की बावड़ी जयपुर में स्थित है।
चमना बावड़ी शाहपुरा में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण चमना नामक गणिका की इच्छा पर महाराजा उम्मेद सिंह के द्वारा करवाया गया था। यह तीन मंजिला बावड़ी है।
चाँद बावड़ी आभानेरी दौसा में स्थित है।
बड़गांव बावड़ी कोटा में स्थित है।
गोबरिया बावड़ी कोटा में स्थित है।
जमना बावड़ी कोटा में स्थित है।
कंसुआ के शिव मंदिर की बावड़ी कोटा में स्थित है।
त्रिमुखी बावड़ी उदयपुर में स्थित है। इसका निर्माण महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे ने करवाया था। इस बावड़ी में तीन ओर से सीढ़ियाँ बनी हुई हैं।
चाँद बावड़ी जोधपुर में भी स्थित है,इसे चौहान बावड़ी भी कहते हैं।
हाड़ीरानी की बावड़ी टोडारायसिंह टोंक में स्थित है। नए जिलों के अनुसार केकड़ी
अमर सागर बावड़ी जैसलमेर में स्थित है।
गड़सीसर सरोवर की बावड़ी जैसलमेर में स्थित है।
परचा बावड़ी जैसलमेर में स्थित है।
कुलधरा की बावड़ी जैसलमेर में स्थित है।
दरिया नाथ की बावड़ी जैसलमेर में स्थित है।
अँधेरी बाग की बावड़ी झालावाड़ के महू बोरदा क्षेत्र की एक प्रसिद्ध बावड़ी है।
गागरोन किले की अँधेरी बावड़ी झालावाड़ में स्थित है।
नसिया जी की बावड़ी झालरापाटन में स्थित है।
प्राचीन श्री पशुपतिनाथ मंदिर की बावड़ी कोटा में स्थित है।
तोपखाना बावड़ी जालौर में स्थित है।
नर्सिंह जी की बावड़ी जालौर में स्थित है।
दूध बावड़ी सिरोही में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण महाराजा सूरजमल ने करवाया था।
लाहिनी बावड़ी यह बावड़ी सिरोही में स्थित है यह राजस्थान की सबसे प्राचीन बावड़ी है।
परम्परिक जल प्रबंधन
सुखेर की बावड़ी उदयपुर में स्थित है।
नीमच माता क्षेत्र की बावड़ी उदयपुर में स्थित है।
चुली बावड़ी जयपुर में स्थित है।
मानजी की बावड़ी जयपुर में स्थित है।
महंत जी की बावड़ी अलवर में स्थित है।
भांडारेज की बावड़ी दौसा में स्थित है।
तापी बावड़ी जोधपुर में स्थित है।
खरबूजा बावड़ी जोधपुर में स्थित है।
हाथी बावड़ी जोधपुर में स्थित है।
सुल्तान बावड़ी उदयपुर में स्थित है।
चौकी बावड़ी भीलवाड़ा में स्थित है।
वीरपुरी की बावड़ी उदयपुर में स्थित है।
केला बावड़ी डूंगरपुर में स्थित है।
फूल बावड़ी पाली में स्थित है।
चार घोड़ो की बावड़ी जयपुर में स्थित है।
तुरजी का झालरा जोधपुर में स्थित है।
खातन की बावड़ी चित्तौड़गढ़ में स्थित है।
भावल देवी की बावड़ी बूंदी में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण अंग्रेजी के अक्षर L आकार में करवाया था।
बाई जी बावड़ी बनेड़ा, भीलवाड़ा में स्थित है।
घड़साना की बावड़ी श्रीगंगानगर में स्थित है।
रंगमहल की बावड़ी श्रीगंगानगर में स्थित है।
कोडमदेसर की बावड़ी बीकानेर में स्थित है
शिवबाड़ी की बावड़ी बीकानेर में स्थित है।
तुर जी का झालरा जोधपुर में स्थित है।
राजा रसालु जी की बावड़ी दौसा जिले में स्थित है।
पनराय जी की बावड़ी जोधपुर में स्थित है।
भीकाजी जी बावड़ी अजमेर में स्थित है।
चार घोड़ों की बावड़ी जोबनेर जयपुर में स्थित है।
जालप बावड़ी जोधपुर में स्थित है।
जल संरक्षण तकनीक
एक चट्टान बावड़ी मण्डौर जोधपुर में स्थित है। इसका निर्माण सातवीं सदी में करवाया गया था। पर्वत माता के नीचे चट्टान खोदकर अंग्रेजी अक्षर L में किया गया था।
बाटाडू का कुआँ बाड़मेर में स्थित है। यह राजस्थान के जलमहल के नाम से प्रसिद्ध है। इसका निर्माण रावल गुलाब सिंह ने करवाया था।
राजस्थान की प्रमुख झीलें
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