राजस्थान के मेले

 राजस्थान के मेले

राजस्थान के मेले

आज की पोस्ट में आपको राजस्थान के मेलों के बारे में बताया जायेगा l

यह टॉपिक राज्य की सभी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

राजस्थान के मेले

  •  रानी सती का मेला झुझुनूँ में लगता है, इस मेले का आयोजन माघ कृष्ण नवमी और भाद्रपद कृष्ण नवमी को होता है। इस मेले पर 1988 से सती निषेध कानून के तहत प्रतिबन्ध है। 

  • बाबा रामदेव मेला मसूरिया जोधपुर में लगता है इस मेले का आयोजन भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को किया जाता है। 

  • बापू महाराज का मेला बाड़ी धौलपुर में लगता है इसका आयोजन भाद्रपद व बैशाख शुक्ल द्वितीया को किया जाता है। 

  • संतचरणदास जी का मेला डेहरा अलवर में लगता है। 

  • गणेश जी का मेला रणथम्भोर सवाई माधोपुर में लगता है। 

  • चुंघी तीर्थ मेला जैसलमेर में लगता है। इस मेले का आयोजन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को किया जाता है। 

  • हनुमान जी का मेला पाण्डुपोल अलवर में लगता है भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी व पंचमी को 

  • भोजन थाली मेला कामाँ (डीग) में लगता है। 

    राजस्थान के मेले

                                                                    राजस्थान के मेले

  • तीर्थराज मेला मचकुण्ड धौलपुर में लगता है। 

  • सवाईभोज मेला आसींद भीलवाड़ा में लगता है। 

  • नागपंचमी मेला मंडोर (जोधपुर) में लगता है। 

  • साँवलिया जी का मेला मण्डफिया चित्तौड़गढ़ में लगता है। 

  • दशहरा मेला कोटा में लगता है। इस मेले का आयोजन आशिवन शुक्ल दशमी को होता है। 

  • डिग्गी कल्याण जी का मेला डिग्गी टोंक में लगता है। भाद्रपद शुक्ल अमावस्या को, श्रावण अमावस्या को, बैसाख पूर्णिमा को। 

  • सारणेश्वर जी का मेला सिरोही में लगता है। 

  • डोल मेला बाँरा में लगता है। 

  • कपिलमुनि मेला कोलायत बीकानेर में लगता है। 

  • गरूड़ मेला भरतपुर में लगता है। 

  • वरकाणा मेला पाली में लगता है। 

  • नाकोड़ा जी का मेला बालोतरा में लगता है।  

  • सीताबाड़ी मेला केलवाड़ा बारां में लगता है, बैशाख पूर्णिमा से ज्येष्ठ अमावस्या तक। 

  • कजली तीज का मेला बूंदी में लगता है। यह मेला भाद्रपद कृष्ण तृतीया को लगता है।  

  • कैला देवी का मेला करौली में लगता है, चैत्र शुक्ल एकम से दशमी तक कालीसिल नदी के तट पर। 

  • पुष्कर मेला अजमेर में लगता है।  

  • बेणेश्वर मेला डूंगरपुर में लगता है।  

  • रामदेव जी का मेला जैसलमेर में लगता है। 

  • मरू महोत्सव जैसलमेर में मनाया जाता है।  

  • थार महोत्सव बाड़मेर में मनाया जाता है। 

  • अन्नकूट मेला नाथद्वारा राजसमंद में लगता है।  

  • खेजड़ली मेला खेजड़ली जोधपुर में लगता है। 

  • वीर फत्ता जी का मेला जालौर में लगता है। 

  • कपिलधारा का मेला सहरियाँ बाँरा में लगता है। 

  • महावीर जी का मेला करौली में लगता है।

  • भद्रकाली मेला हनुमानगढ़ में लगता है।

  • गौतम जी का मेला सिरोही में लगता है।

  • ऋषिकेश महादेव जी का मेला सिरोही में लगता है।

  • वीरपुरी मेला मंडोर जोधपुर में लगता है यह मेला श्रावण के अंतिम सोमवार को लगता है।

  • धींगागवर बेंतमार मेला जोधपुर में लगता है इसका आयोजन बैशाख कृष्ण तृतीया को किया जाता है।

  • चामुंडा माता का मेला जोधपुर में लगता है।

  • शाकम्भरी माता का मेला झुन्झुनू में लगता है।

  • बीजवा माता का मेला डूंगरपुर में लगता है।

  • जौहर मेला चित्तौड़गढ़ में लगता है इस मेले का आयोजन चैत्र कृष्णा एकादशी को होता है।

  • निंबो का नाथ मेला पाली में लगता है।

  • सेवाड़िया मेला सांचौर जालौर में लगता है।

  • विक्रमादित्य मेला सलूम्बर में लगता है। इसका आयोजन चैत्र अमावस्या को होता है।

  • गोर मेला सिरोही में लगता है,इसका आयोजन बैसाख शुक्ल चतुर्थी को होता है।

  • सुईया मेला चौहटन बाड़मेर में लगता है।

  • घोटिया अम्बा मेला बांसवाड़ा में लगता है,इसका आयोजन चैत्र आमवस्या को (चैत्र कृष्णा त्रयोदशी से चैत्र शुक्ल द्वितीय तक

  • राम रावण मेला चित्तौड़गढ़ में लगता है। इस मेले का आयोजन चैत्र शुक्ल दशमी को होता है।

  • खेड़ा मेला बालोतरा में लगता है।

  • चमत्कार जी मेला सवाईमाधोपुर में लगता है।

  • केसरियाजी का मेला धुलेव उदयपुर में लगता है चैत्र कृष्ण अष्टमी को।

  • संत लालदास जी का मेला अलवर में लगता है।

  • बाण गंगा मेला  विराटनगर कोटपूतली बहरोड़ में लगता है इसका आयोजन बैसाख पूर्णिमा को होता है।

  • कानन मेला बालोतरा में लगता है। इस मेले का मुख्य केंद्र गैर नृत्य होता है।

  • गोतमेश्वर जी का मेला अरनोद प्रतापगढ़ में लगता है सुकड़ी नदी पर बैशाख माह में।

  • जम्भेश्वर जी का मेला फाल्गुन कृष्णा अमावस्या एवं आशिवन कृष्णा अमावस्या को बीकानेर नोखा तहसील में लगता है।

  • भृतहरी मेला यह अलवर में लगता है, इस मेला का आयोजन बैशाख माह एवं भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मेला किया जाता है। यह नाथ संप्रदाय का प्रमुख मेला है इसमें कनफटे साधु बड़ी संख्या में आते है। कालबेलिया नृत्य इस मेले मुख्य आकर्षण है महाराज भृतहरि उज्जैन में राजा विक्रमादित्य के भाई थे।

  • जीण माता का मेला रैवासा सीकर में लगता है चैत्र और आश्विन नवरात्रों में।

  • कपालेश्वर महादेव मेला यह चौहटन बाड़मेर में लगता  है  इस मेले का आयोजन 12 वर्ष में एक बार होता है इस कुम्भ मेले का लघु मरुस्थलीय रूप कहा जा सकता है।

  • श्याम बाबा का मेला जैतपुरा अलवर लगता है यह मेला फाल्गुन शुक्ल एकादशी को लगता है।

  • मेहंदीपुर बालाजी का मेला दौसा में लगता है इस मेले का आयोजन चैत्र पूर्णिमा को होता है हनुमान जी के जन्म दिन पर।

  • सालासर बालाजी का मेला चूरू में लगता है इस मेले का आयोजन चैत्र पूर्णिमा को होता है हनुमान जी के जन्म दिन पर।

  • हुरंगा मेला यह भरतपुर में लगता है, इस मेले का आयोजन चैत्र कृष्णा पंचमी से अष्टमी तक।

  • बादशाह मेला ब्यावर में लगता है इस मेले आयोजन चैत्र कृष्णा प्रतिपदा को किया जाता है। यह मेला बादशाह की सवारी के लिए प्रसिद्ध है।

  • ऋषभदेव जी मेला यह धुलेव उदयपुर में लगता है चैत्र कृष्णा अष्टमी – नवमी को।

  • धनोप माता का मेला धनोप गांव शाहपुरा भीलवाड़ा में लगता है इस मेले का आयोजन नवरात्रा में चैत्र शुक्ल एकम से दशमी तक।

  • शीतला माता मेला यह मेला शील की डूंगरी चाकसू जयपुर में लगता है इसका आयोजन चैत्र कृष्णा अष्टमी को किया जाता है।

  • गंगा दशहरा मेला यह कामां डीग में लगता है इसका आयोजन ज्येष्ठ सुदी सप्तमी से बारस तक।

  • गरासिया जनजाति का मेला अम्बा सिरोही में लगता है इस मेले का आयोजन बैशाख पूर्णिमा को किया जाता है।

  • कल्पवृक्ष मेला यह मांगलियावास अजमेर में लगता है इस मेले आयोजन हरियाली अमावस्या को किया जाता है।

 धन्यवाद

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