राजस्थान के लोकदेवता

राजस्थान के लोकदेवता

इस पोस्ट में आपको राजस्थान के लोकदेवताओं के बारे में सम्पूर्ण रूप से बताया जाता है।

 

सबसे पहले हम रामदेवजी के बारे में बताऐगें आपको राजस्थान के लोकदेवता

रामदेवजी, गोगाजी, मेहाजी, हड़बू जी, पाबू जी, ये हमारे पंच पीर है।


 

रामदेवजी

 

    • उडूकाश्मीर (बाड़मेर) में रामदेवजी का जन्म हुआ था।

    • जन्म भाद्रपद शुक्ल द्वितीया बाबा री बीज

    • विक्रम संवत 1409 (लगभग 1352-1405 ईस्वी)

    • रामदेव जी पिता जी का नाम अजमाल कँवर जी हैं।

    • रामदेव जी की माता जी का नाम मैणादे है।

    • रामदेव जी की पत्नि का नाम नेतलदे हैं।

    • रामदेवजी का मंदिर जैसलमेर में स्थित हैं।

    • रामदेवजी के गुरू जी का नाम बालीनाथ जी हैं।

    • रामदेवजी ने भैरव नामक राक्षस का वध किया था।

    • रामदेव जी को कृष्ण का अवतार माना जाता है।

    • रामदेवजी के बड़े भाई का नाम वीरमदेव जी है।

    • कुष्ठ व हैजा निवारका रामदेवजी को कहा जाता हैं।

    • बाबा रामदेवजी ने कामड़िया संप्रदाय की स्थापना की थी।

    • रामदेवजी का 24 वाणियाँ प्रसिद्ध है।

    • रामदेवजी ने मूर्ति पूजा का खण्डन किया था।

    • बाबा रामदेव जी का मेला मसूरिया जोधपुर मे लगता हैं।

    • रामदेवजी का प्रसिद्ध मेला रूणेचा मे लगता है।

    • पाली जिले के बिराटियां खुर्द में भरने वाला मेला रामदेवजी से संबंधित है।

    • सामप्रदायिक सौहार्द के नाम से रामदेवजी को याद किया जाता हैं।

    • जैसलमेर जिले मे लोकदेवता रामदेवजी की समाधी अवस्थित है।

    • रामदेवजी के मौसेरे भाई का नाम हड़बू जी सांखला हैं।

    • रामदेव जी घोड़ी का नाम लीला था।

    • रामदेव जी ध्वजा को नेजा कहा जाता है।

    • रामदेवजी ने रामदेवरा में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को समाधी ली थी।

    • राम सरोवर रूणेचा में रामदेव जी ने जीवित समाधि ली थी।

    • रामदेवजी से एक दिन पहले उनकी धर्म बहन डाली बाई ने समाधि ली थी।

    • डाली बाई वे मेघवाल समाज से थी और रामदेवजी की परम शिष्या थी।

 

 

राजस्थान के लोकदेवता

पाबू जी राठौड़

 

    • पाबू जी का जन्म 1239 को हुआ था।

    • पाबू जी का जन्म कोलमण्ड जोधपुर वर्तमान फलौदी  में हुआ था।

    • पाबू जी के पिता जी का नाम धांधल जी राठौड़।

    • पाबू जी की माता जी का नाम कमलादे है।

    • पाबू जी की पत्नी का नाम सुप्यारदे फूलमदे।

    • केसर कालमी पाबू जी की घोड़ी का नाम हैं।

    • चैत्र अमावस्या को पाबू जी का मेला लगता है।

    • पाबू जी की बहन का नाम पेमलदे।

    • पाबू जी का मंदिर जोधपुर में स्थित हैं।

    • पाबू की फड़ राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध है।

    • पाबूजी को ऊँटों का देवता है।

    • पाबू जी के गुरू जी का नाम समरथ भारती था।

    • गौरक्षक पाबूजी को कहा जाता है।

    • पाबू जी को लक्ष्मण का अवतार माना जाता है।

    • प्लेग रक्षक देवता पाबूजी राठौड़ को कहते है।

    • पाबू जी ढेचू में वीरगति को प्राप्त हुए थे।

    • रूपनाथ जी पाबू जी के भतीजे थे।

    • भगवान लक्ष्मण का अवतार पाबू जी मानते है राईका रेबारी जाति

    • मारवाड़ में सर्वप्रथम ऊँट लाने का श्रेय पाबू को जाता है।

    • पाबू जी देवलचारणी की गायें छुड़ाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।

    • लोकदेवता पाबू जी की फड़ राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध फड़ हैं।

    • रूपनाथ जी ने जिंदराव खींची को मारकर पाबू जी की मृत्यु का बदला लिया था।

    • पाबू की बहन का विवाह जिंदराव खींची के साथ हुआ जो कि जायल नागौर का निवासी था।

 

तेजाजी

 

    • लोक देवता वीर तेजाजी का जन्म माघ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी,

    • विक्रम संवत 1130 (अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 29 जनवरी 1074 ईस्वी) को

    • राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गाँव में हुआ था।

    • तेजाजी के पिता जी का नाम ताहड़जी धौलिया जाट है।

    • तेजाजी की माता जी का नाम रामकुंवरी है।

    • तेजाजी का विवाह पेमल दे के साथ में हुआ था।

    • लीलण/सिणगारी तेजाजी की घोड़ी का नाम था।

    • तेजाजी पंचपीर में शामिल नहीं हैं।

    • तेजाजी महावीर कहलाते हैं।

    • तेजाजी को परबतर मेले में याद किया जाता है।

    • तेजाजी की कर्मस्थली बाँसीदूंगारी बूंदी में स्थित है।

    • परबतसर को तेजाजी की मुख्य तीर्थ स्थल माना जाता हैं।

    • तेजाजी विशेषतः अजमेर नागौर जिलों मे लोकप्रिय थे।

    • तेजाजी महाराज का ससुराल पनेर में है।

    • तेजाजी को काला बाला का देवता है।

    • सुरसुरा मे तेजाजी की मृत्यु हुई थी।

    • तेजाजी को सर्प ने जीभ पर डसा था।

    • तेजाजी की मृत्यु लाछा गुजरी गायें छुड़वाते हुई थी।

 

गोगा जी

 

    • लोकदेवता गोगाजी का जन्म 1003 ईस्वी में हुआ था।

    • गोगा जी के पिता जी का नाम जेवर दे हैं।

    • गोगा जी की माता जी का नाम बाछल दे हैं।

    • गोगा जी की पत्नी का नाम केलमदे हैं।

    • केसरिया कुंवर जी गोगाजी के पुत्र थे।

    • गोगा जी का मंदिर ददरेवा चुरू में स्थित हैं।

    • गोगा जी घोड़ी का नाम नीली घोडी / जावड़िया हैं।

    • 12 साल तक गोरखनाथ की पूजा की बाछल दे ने ।

    • भाद्रपद कृष्ण पक्ष नवमी को गोगा जी का मेला लगता है।

    • बाछल जी की बहन काछल जिनके दो पुत्र हुए अर्जन व सर्जन।

    • महमूद गजनवी गोगा जी के समकालीन थे।

 

हड़बूजी

 

    • इनका जन्म 15 वी सदी में भूंडेल नागौर में हुआ था।

    • इनके पिता जी का नाम मेहाजी/मेहराज सांखला हैं।

    • इनकी माता जी का नाम सौभाग्य देवी हैं।

    • इनके गुरू जी का नाम बालीनाथ है।

    • इनका वाहन सियार हैं।

    • ये रामदेवजी के मोसरे भाई है।

    • इनका मेला भाद्रपद कृष्णषष्ठी को लगता है।

    • ये राव जोधा के समकालीन थे।

    • राव जोधा को इन्होेंने मारवाड का पुनः राज्य प्राप्त होने का आर्शीवाद और

      कटार भेंट की थी।

    • राव जोधा ने इन्हे बेंगटी गाँव दान में दिया था,जहाँ इनका मंदिर बना हुआ है।

    • इनके मंदिर में गाड़ी की पूजा होती है।

    • इनके पुजारी सांखला जाति का होता है।

    • इन्हें सिद्धपुरुष शकुन, शास्त्र के ज्ञाता, वीर योद्धा कहते है।

    • हडबू जी ने चाखु गाँव बापिनी फलौदी में तपस्या की थी।

 

मेहाजी मांगलिया

 

मेहाजी इनका जन्म 14 वी सदी में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को तापू गांव ओसियां जोधपुर में हुआ था इनके पिता का नाम गोपालराव सांखला कितु करणोत था। इनकी माताजी का नाम मायड़ दे था। मेहाजी ने पुष्कर की पाना गुजरी को अपनी धर्म बहन बनाया था। पाना गुजरी की गायों को राणंगदेव ले गए थे उन गायों को छुड़ाते हुए ही मेहाजी बापिनी गाँव फलौदी में वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इनके घोड़े का नाम किरड़ काबरा था। राणंगदेव जैसलमेर के शासक थे जिनसे युद्ध करते हुए ही मेहाजी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इनका मंदिर बापिनी गाँव फलौदी में बना हुआ है।

 

देवनारायण जी

इनका जन्म 1243 ईस्वी में भीलवाड़ा के आसींद तहसील के गोंठा दंडावता गांव में हुआ था इनके पिता का नाम सवाई भोज था इनकी माताजी का नाम सेढू खटाणी था इनकी पत्नी का नाम पीपल दे था। इनके बचपन का उदयसिंह था। इनकी फड़ सबसे प्राचीन व सबसे लम्बी चित्रित फड़ है इनकी फड़ का वाचन गुर्जर भोपे द्वारा जंतर वाद्य यंत्र के साथ किया जाता है। इनके घोड़े का नाम लीलागर है। इनकी प्रतिमा की जगह ईंट की पूजा की जाती है।

डूंगजी जवाहर जी

ये शेखावाटी क्षेत्र के लोकदेवता है या धनी लोगों को लूटकर उनका धन गरीबों में बाँट देते थे। ये दोनों रिश्ते में चाचा भतीजे थे ये कच्छवाह वंशीय राजपूत थे।

 

वीर कल्ला जी राठौड़

 

इनका जन्म 1544 ईस्वी में हुआ था सामियाना गांव नागौर में इनके पिता जी का नाम आस सिंह था और माता जी का नाम श्वेतकँवर था इनके गुरु जी नाम भैरवनाथ था। इन्हें शेषनाग का अवतार, चार हाथों वाले देवता, केहर, आदि नामों से जाना जाता है। आश्विन शुक्ल दशमी को मेला लगता है। चित्तोड़ के तीसरे साके में अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। मीरा बाई इनकी बुआ थी। नागणेची माता जी इनकी कुल देवी है।

  राजस्थान के लोकदेवता

राजस्थान के मंदिर

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